वैज्ञानिकों ने विकसित किया इलेक्ट्रॉनिक पौधा, विज्ञान के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत

लंदन: वैज्ञानिकों ने पौधे के संवहन तंत्र में सर्किट लगाकर एक इलेक्ट्रॉनिक पौधे का निर्माण किया है। इससे विज्ञान के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत हो सकती है।


वैज्ञानिकों ने विकसित किया इलेक्ट्रॉनिक पौधा, विज्ञान के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत




स्वीडन के लिकोंपिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के दल ने पौधों के अंदर लगाए गए तारों, डिजिटल लॉजिक और प्रदर्शनकारी तत्वों को दिखाया गया है, जो आर्गेनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के नए अनुप्रयोगों और वनस्पति विज्ञान में नए उपकरण विकसित करने में मददगार हो सकते हैं।
उमीआ प्लांट साइंस सेंटर के निदेशक और प्लांट रिप्रोडक्शन बायलॉजी के प्रोफेसर ओव निल्सन ने कहा, इससे पहले वैज्ञानिकों के पास जीवित पौधे में विभिन्न अणुओं के सकेंद्रण को मापने के लिए कोई अच्छा उपकरण नहीं था, लेकिन इस शोध के बाद हम पौधों का विकास करने वाले उन विभिन्न पदार्थो की मात्रा को प्रभावित करने में सक्षम हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा, पौधों में रासायनिक मार्गो पर नियंत्रण से प्रकाश संश्लेषण आधारित ईंधन सेल, सेंसर्स (ज्ञानेंद्रियों) और वृद्धि नियामकों के लिए रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही ऐसे उपकरण भी तैयार किए जा सकते हैं, जो पौधों की आंतरिक क्रियाओं को व्यवस्थित कर सकें।
उन्होंने कहा, यह सफलता वनस्पति विज्ञान और ऑर्गेनिक साइंस के विविध क्षेत्रों के विलय की ओर पहला कदम है। हमारा उद्देश्य उर्जा की मदद से पर्यावरण और वनस्पति विज्ञान के नए रास्तों को खोजना है। यह अध्ययन साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
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घर बैठे चला रहे हैं अपना 'चैनल'



मुख्य रूप से वीडियो देखने और मनोरंजन का साधन मानी जाने वाली यूट्यूब वेबसाइट का इस्तेमाल अब शिक्षा के प्रचार प्रसार में भी हो रहा है.
खाना बनाना, गीत संगीत से लेकर सिलाई कढ़ाई तक के कामों को आप वीडियो देख कर ऑनलाईन सीख सकते हैं.
यूट्यूब के माध्यम से लोगों के मोबाईल पर पहुंच कर, कुछ 'शिक्षक' न सिर्फ़ आधारभूत शिक्षा ही दे रहे हैं बल्कि एक बेरोज़गार को रोज़गार भी दिला रहे हैं.

एग्ज़ाम फ़ीवर

Image copyrightsangathan palghar school
यू-ट्यूब पर ज़्यादातर वीडियो मनोरंजन आधारित होते हैं लेकिन शिक्षाप्रद वीडियो भी अब यहां आपको नज़र आने लगे होंगे.
ये वीडियो लोगों को सिर्फ़ शिक्षित ही नहीं कर रहे बल्कि उनको बेहतर स्किल भी दे रहे हैं और ऐसे ही कुछ नि:शुल्क यू-ट्यूब वीडियो चैनल आजकल लोकप्रिय हो रहे हैं.
ऐसा ही एक चैनल है 'एग्ज़ाम फ़ीवर' जिसे रोशनी मुखर्जी चलाती हैं और इस चैनल के 83 हज़ार सब्सक्राइबर हैं.
झारखंड के धनबाद ज़िले में पली-बढ़ी रोशनी मुखर्जी को बचपन से ही पढ़ाई से लगाव था और बैंगलूरू की एक आई टी कंपनी में विश्लेषक के तौर पर काम कर रही रोशनी ने 2011 में यू-ट्यूब पर 'एक्ज़ाम फ़ीवर' के नाम से चैनल बनाया.
लगभग हर दिन रोशनी इस चैनल पर दो वीडियो अपलोड करती हैं और अपने चैनल पर आने वाले छात्रों को विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी देती हैं.
Image copyrightroshni mukherji
रोशनी कहती हैं, "पढ़ाना मेरा पैशन है और आईटी सेक्टर में रहने के कारण मुझे पता था की इंटरनेट के माध्यम से ही कुछ करना है, आप मेरे चैनल को एक ऑनलाईन ट्यूशन कह सकते हैं."
आर्थिक पहलू पर बात करते हुए रोशनी कहती हैं, "एक्ज़ाम फ़ीवर मेरा जुनून है बिज़नेस नहीं पर इसे चलाने के लिए भी लागत लगती है इसलिए मैंने आर्थिक मदद के लिए एक नया ऑप्शन बनाया है."

के श्रीप्रिया कनिगोल्ला

कोयंबटूर में रहने वाली गृहणी श्रीप्रिया कनिगोल्ला बचपन से ही चित्रकला और कारीगरी में दिलचस्पी थी जिसमें शामिल है फैब्रिक पेंटिंग, माला बनाना, फूल बनाना.
अपनी शिल्प कला को युट्यूब चैनल में डालने के लिए पांच साल पहले प्रोत्साहन दिया उनके 16 वर्षीय बेटे ने, "मुझे तो कैमरा भी चलाना नहीं आता था लेकिन अब मैंने वीडियो की एडिटिंग के लिए सॉफ्टवेयर सीख लिया है और सारे वीडियो मैं खुद ही बनाती और अपलोड करती हूँ."
श्रीप्रिया के चैनल के लगभग 40 हज़ार सब्सक्रिप्शन हैं और अब तक उन्होंने 240 वीडियो अपलोड किए, उनकी कोशिश रहती है कि वो हर हफ़्ते करीबन 2 वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करें.
2010 में शुरू किए इस चैनल के लिए वो कहती हैं, "पेंटिंग करना और क्राफ्ट बनाना मेरा शौक है और मुझे ख़ुशी है की लोग इसका लाभ उठा रहे हैं. कितने लोग इस कला के वीडियो को देखकर स्कूलों में सिखा रहे हैं. मुझे ख़ुशी है की मैं लघु उद्योग को बढ़ावा दे रही हूँ."
2012 में उनकी यूट्यूब के साथ पार्टनरशिप हुई और कुछ पैसे मिलना भी शुरू हो गए हैं और उनके अधिकतर दर्शक जर्मनी, अर्जेंटीना से है जो अक्सर इस कला से जुड़े सवाल पूछते रहते है.

मेक मी जीनियस

2010 में कुछ छात्रों द्वारा शुरू किया गया युट्यूब चैनल 'मेक मी जीनियस' बच्चों के लिए दिलचस्प एनीमेशन के ज़रिए विज्ञान के वीडियो अपलोड करता है.
5 साल से जारी इस चैनल के लगभग 70 हज़ार सब्सक्रिप्शन हैं.
हालांकि ये छात्र अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते हैं क्योंकि वो इसे प्रसिद्धि के लिए नहीं कर रहे हैं.
नाम न बताने की शर्त पर इस चैनल के संस्थापक कहते हैं, "न हमें फ़ेम चाहिए, न पैसा. बस मैं इतना कह सकता हूँ कि हम कुल 5 लोग हैं."
इन छात्रों का लक्ष्य है की वो निस्वार्थ और मुफ़्त एजुकेशन दें और हर हफ़्ते वीडियो डालने वाले इस ग्रुप को अब यूट्यूब के विज्ञापन से पैसे मिलने लगे हैं.
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