रविवार, 23 अगस्त 2015

75 वर्ष से हवा के दम पर जिंदा प्रहलाद जानी



गुजरात के मेहसाणा जिले में रह रहे 83 वर्षीय प्रहलादजानी उर्फ माताजी चुनरी वाले (पुरुष साधक) पिछले 75 साल से बिना कुछ खाए-पिए रहने तथा दैनिक क्रियाओं को भी योग की शक्ति से रोक देने की वजह से चिकित्सा विज्ञान के लिए एक चुनौती बन गए हैं। इस वक्त उनकी उम्र 83 वर्ष है।

प्रहलाद जानी स्वयं कहते हैं कि यह तो दुर्गा माता का वरदान हैं, 'मैं जब 12 साल का था, तब कुछ साधू मेरे पास आए। कहा, हमारे साथ चलो, लेकिन मैंने मना कर दिया। करीब छह महीने बाद देवी जैसी तीन कन्याएं मेरे पास आयीं और मेरी जीभ पर अंगुली रखी। तब से ले कर आज तक मुझे न तो प्यास लगती है और न भूख।'
 
चराड़ा गांव निवासी प्रहलाद भाई जानी कक्षा तीन तक पढे़ लिखे हैं। जानी का दावा है कि दैवीय कृपा तथा योग साधना के बल पर वे करीब 75 वर्ष से बिना कुछ खाए पिए-जिंदा हैं।  
 
मल मूत्र भी नहीं बनता : इतना ही नहीं मल-मूत्र त्यागने जैसी दैनिक क्रियाओं को योग के जरिए उन्होंने रोक रखा है। स्टर्लिंग अस्पताल के न्यूरोफिजिशियन डॉ. सुधीर शाह बताते हैं कि जानी के ब्लैडर में मूत्र बनता है, लेकिन कहां गायब हो जाता है इसका पता करने में विज्ञान भी अभी तक विफल ही रहा है।
 
क्या कहता है विज्ञान?
डॉक्टरों का मानना है कि कोई भी वयस्क व्यक्ति बिना खाना खाए 30 से 40 दिन तक जीवित रह सकता है। लेकिन बिना पानी के पांच दिन से ज्यादा जिन्दा रहना सम्भव ही नहीं है। अभी तक उपलब्ध आंकणों के अनुसार 1981 में उत्तरी आयरलैण्ड में कैदियों ने भूख हड़ताल की थी, जिसमें 10 कैदियों की मृत्यु हो गई थी। उन कैदियों में सिर्फ एक व्यक्ति ही 73 दिन बिना खाए-पिए जिंदा रह पाया था।
 
कुल मिलाकर विज्ञान और आध्यात्म के बीच फंसी ये पहेली सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। प्रहलादभाई के मुताबिक दूसरे देशों के कई डॉक्टर भी उन्हें अपने यहां बुलाकर रिसर्च करना चाहते हैं, लेकिन वो अपना देश छोड़कर बाहर नहीं जाना चाहते।
सीसीटीवी की निगाह में रखा कई दिन : भारत के डॉक्टर 2003 और 2005 में भी प्रहलाद जानी की अच्छी तरह जांच-परख कर चुके हैं। इन जाचों के अगुआ रहे अहमदाबाद के न्यूरॉलॉजिस्ट (तंत्रिकारोग विशेषज्ञ) डॉ. सुधीर शाह ने कहा, 'उनका कोई शारीरिक ट्रांसफॉर्मेशन (कायाकल्प) हुआ है। वे जाने-अनजाने में बाहर से शक्ति प्राप्त करते हैं। उन्हें कैलरी (यानी भोजन) की जरूरत ही नहीं पड़ती। हमने तो कई दिन तक उनका अवलोकन किया, एक-एक सेकंड का वीडियो लिया। उन्होंने न तो कुछ खाया, न पिया, न पेशाब किया और न शौचालय गए।'

22 अप्रैल 2011 को प्रहलाद जानी डॉक्टरी जाँच-परख के लिए एक बार फिर अहमदाबाद के एक अस्पातल में 15 दिनों तक भर्ती थे। इस बार भारतीय सेना के रक्षा शोध और विकास संगठन का शरीरक्रिया। विज्ञान संस्थान DIPAS जानना चाहता था कि प्रहलाद जानी के शरीर में ऐसी कौन सी क्रियाएं चलती हैं कि उन्हें खाने-पीने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ती।
 
तीस डॉक्टरों की एक टीम ने तरह-तरह की डॉक्टरी परीक्षाएं कीं। मैग्नेटिक रिजोनैंस इमेजींग मशीन से उन के शरीर को स्कैन किया। हृदय और मस्तिष्क क्रियाओं को तरह तरह से मापा। रक्त परीक्षा की, दो वीडियो कैमरों के द्वारा चौबीसो घंटे प्रहलाद जानी पर नजर रखी। जब भी वे अपना बिस्तर छोड़ते, एक वीडियो कैमरा साथ-साथ चलता। तत्पश्चात यह पाया कि प्रहलाद जानी का दावा एकदम सच है। वे सचमुच बिना खाना और पानी के न सिर्फ जिंदा हैं बल्कि पूरी तरह से स्वस्थ भी हैं।
 
इस दौरान हर आधे से एक घंटे में प्रहलाद जानी को फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, गेस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट,एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबिटोलॉजिस्ट, यूरो सर्जन, आंख के डॉक्टर और जेनेटिक के जानकार डॉक्टरों की टीम के जरिए चेक किया जाता रहा और उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती रही।
 
डॉ. शाह बताते हैं कि पहली बार माताजी का मुंबई के जे.जे. अस्पताल में परीक्षण किया गया था, लेकिन इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका। वे बताते हैं कि यह माताजी कभी बीमार नहीं हुए, उनकी शारीरिक क्रियाएं सभी सामान्य रूप से क्रियाशील हैं। चिकित्सक समय-समय पर उनका परीक्षण भी करते हैं, लेकिन ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट आदि सभी सामान्य ही पाई गई हैं। चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान डिस्कवरी चैनल ने भी उन पर एक लघु फिल्म तैयार की है। इसके अलावा डॉ. शाह ने भी माताजी के तथ्यों को केस स्टडी के रूप में अपनी वेबसाइट पर डालकर दुनिया के चिकित्सकों को इस पहेली को सुलझाने की चुनौती दी है, लेकिन फिलहाल तक कोई भी इस पहेली को नहीं सुलझा पाया है।
 
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उर्मन ध्रूव बताते हैं कि जानी का शरीर पूरी तरह स्वस्थ है, चिकित्सा विज्ञान के समक्ष वे अब तक अबूझ पहेली बने हुए हैं। उनकी एक भी कोशिका में चर्बी का कोई अंश नहीं है। इसे दैवीय कृपा नहीं कहा जा सकता, लेकिन उनके शरीर में ऊर्जा का कोई अतिरिक्त स्रोत जरूर है। वैज्ञानिक इसे करिश्मा कहने से फिलहाल बच रहे हैं पर इतना जरूर मानते हैं कि प्रहलाद जानी आम इंसान से अलग हैं।
 
10 दिन की पड़ताल के बाद तीन सौ डॉक्टरों की टीम ने रिपोर्ट दी कि-
1. 10 दिन तक प्रह्लादभाई ने कुछ नहीं खाया, यहां तक की पानी भी नहीं पीया
2. 10 दिन बाद भी उनके शरीर के सभी अंग पहले की तरह काम कर रहे हैं
3. दिल की धड़कनों में कोई खास बदलाव नहीं आया
4. पेट की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में भी कुछ गड़बड़ी नहीं
5. दिमाग के एमआरआई में भी कुछ खास नहीं निकला
6. सीने का एक्स-रे भी सामान्य रहा
7. 10 दिन भूखे रहने पर कोई असर नहीं
8. हीमोग्लोबीन के स्तर में कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
 
परिणाम आने की प्रतीक्षा : 
इस बार डीएनए विश्लेषण के लिए आवश्यक नमूने भी लिए गए। शरीर के हार्मोनों, एंज़ाइमों और ऊर्जादायी चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) क्रिया संबंधी ठेर सारे आंकड़े जुटाए गए। उनका अध्ययन करने और उन्हें समझने-बूझने में दो महीने तक का समय लग सकता है।
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी इसमें रुचि दिखाई थी। यदि माताजी के ऊर्जा का स्रोत का पता चल जाता है तो शायद यह अंतरिक्ष यात्रियों एवं सेना के जवानों के लिए कारगर साबित होगा। यदि जानी के ऊर्जा स्रोत का पता चल जाता है तो चिकित्सकों का दावा है कि इससे अंतरिक्ष यात्रियों तथा सेना के जवानों की खाद्य समस्या हल हो सकती है साथ ही अकाल एवं भुखमरी जैसी समस्या को भी समाप्त किया जा सकता है।

अगर इसके पीछे प्रहलादभाई के शरीर में मौजूद कोई खास जीन काम कर रहा है तो उसे जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से खोजना होगा। अगर ऐसा हो गया तो-
1. दुनियाभर में भुखमरी की समस्या से निपटा जा सकता है।
2. इंसान के बीमार शरीर को स्वस्थ किया जा सकता है।
3. बुढ़ापे को रोकने में मदद मिल सकती है।
4. बर्फीले पहाड़ों पर रह रहे सैनिकों को मदद मिलेगी।
5. अंतरिक्ष यात्रा पर गए लोगों को खाने का सामान साथ नहीं ले जाना पड़ेगा।
 
अंत में जानिए भूखे रहने का रहस्य...


प्रहलाद जानी अपनी आयु के आठवें दशक में भी नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं और ध्यान लगाते हैं। योगी-ध्यानी व्यक्तियों में चमत्कारिक गुणों की कहानियों पर भारत में लोगों को आश्चर्य नहीं होता, पर विज्ञान उन्हें स्वीकार नहीं करता।

आज भी भारत की धरती पर ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने कई वर्षों से भोजन नहीं किया, लेकिन वे सूर्य योग के बल पर आज भी स्वस्थ और जिंदा हैं। भूख और प्यास से मुक्त सिर्फ सूर्य के प्रकाश के बल पर वे जिंदा हैं।
 
प्राचीनकाल में ऐसे कई सूर्य साधक थे, जो सूर्य उपासना के बल पर भूख-प्यास से मुक्त ही नहीं रहते थे बल्कि सूर्य की शक्ति से इतनी ऊर्जा हासिल कर लेते थे कि वे किसी भी प्रकार का चमत्कार कर सकते थे। उनमें से ही एक सुग्रीव के भाई बालि का नाम भी लिया जाता है। बालि में ऐसी शक्ति थी कि वह जिससे भी लड़ता था तो उसकी आधी शक्ति छीन लेता था।
 
वर्तमान युग में प्रहलाद जानी इस बाद का पुख्ता उदाहरण है कि बगैर खाए-पीए व्यक्ति जिंदगी गुजार सकता है। गुजरात में मेहसाणा जिले के प्रहलाद जानी एक ऐसा चमत्कार बन गए हैं जिसने विज्ञान को चौतरफा चक्कर में डाल दिया है। वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ऐसा कैसे संभव हो रहा है? sabhar :http://www.aajtak24.in/

 

तो क्या रोबोट भी हो जाएंगे धार्मिक..?

तो क्या रोबोट भी हो जाएंगे धार्मिक..?

वैज्ञानिकों में इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है कि क्या कृत्रिम बुद्धि से बने एंड्रॉयड्‍स (रोबो) भी धार्मिक हो सकते हैं। उनका कहना है कि संभव है कि एक दिन रोबो की कोई धर्म अपना लें और इसका अर्थ है कि वे मानवता की सेवा कर सकते हैं और इसे नष्ट करने की कोशिश नहीं करेंगे। लेकिन इसका उल्टा भी सच हो सकता है और संभव है कि धार्मिक होने से उनकी ताकत में बढ़ोतरी हो जाए।

मैसाचुसेट्‍स इंस्टीट्‍यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के मर्विन मिंस्की का कहना है कि किसी दिन कम्प्यूटर्स भी नीति शास्त्र को विकसित कर सकते हैं, लेकिन इस बात को लेकर चिंताएं हैं कि इन मशीनों को लेकर सारी दुनिया में धार्मिक संघर्ष भी पैदा हो सकता है।  
 
डेलीमेल डॉटकॉम के लिए एल्ली जोल्फागारीफार्ड का कहना है कि वैज्ञानिक मानते हैं कि कृत्रिम बुद्धि (आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस) दशकों की अपेक्षा वर्षों में एक वास्तविकता हो सकती है। हाल ही में एलन मस्क ने चेतावनी दी है कि आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस मनुष्यता के लिए परमाणु हथियारों की तरह से घातक हो सकती है।

डेलीमेल डॉटकॉम में डिलन लव ने हाल ही में एक सारगर्भित रिपोर्ट पेश की थी जिसमें ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई थी। लेकिन मॉर्मन ट्रांसह्यूमनिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष, लिंकन कैनन ने लव से कहा कि कम्प्यूटर साइंस में ऐसे कोई नियम नहीं हैं कि सॉफ्टवेयर के लिए धार्मिक विश्वास रखना संभव होगा।

उनका कहना था कि धर्म विरोधियों के मध्य कुछ ऐसी भोलीभाली आवाजें हैं जो कि एक मशीनी बुद्धि और धार्मिक विश्वासों के बीच तकनीकी असंगति की कल्पना करते हैं। इंस्टीट्‍यूट फॉर एथिक्स एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज से जुड़े एक स्कॉलर, जॉन मेसरली, का कहना है कि ' मैं मानता हूं कि आप कृत्रिम बुद्धि को लगभग किसी भी चीज पर विश्वास करने के लिए प्रोग्राम कर सकते हैं। वहीं कैनन का कहना है कि धार्मिक सुपरइंटेलीजेंस या तो सबसे अच्‍छी या सबसे खराब सिद्ध हो सकती है। उनका मानना है कि धर्म मात्र एक ताकत है और इसका उपयोग अच्‍छे या बुरे के लिए किया जा सकता है।

पर जानकारों का कहना है कि धर्म पहले से ही अपने आप में सहिष्णु नहीं है और जिस धर्म के पास सुपरइंटेलीजेंस होगी, वह तो और भी कम ‍सहिष्णु होगा। इन सवालों के बीच एक और प्रश्न उठा है कि क्या कृत्रिम बुद्धि की भी कोई आत्मा (सोल) हो सकती है? जबकि स्वीडिश दार्शनिक निक बॉस्ट्रम का कहना है कि 'सबसे बड़ा डर इस बात का है कि जैसे-जैसे रोबो अधिक स्मार्ट होते जाएंगे, वे एक ऐसा रास्ता चुनेंगे जोकि उनके अस्तित्व को निरंतर बने रहने को सुनिश्चित करता हो और इसका अर्थ मनुष्यता का विनाश हो सकता है।' पर प्रसिद्ध कॉमेडियन ड्रंकन ट्रसेल और रेवरेंड क्रिस्टोफर बेनेक मानते हैं कि धर्म के कारण रोबो मनुष्यता के साथ-साथ रह सकते हैं।

पिछले महीने ही एलन मस्क ने एक हजार रोबोटिक्स विशेषज्ञों को चेताया कि स्वचालित हथियार कल के कलाश्निकोव साबित होंगे। इससे पहले प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग भी कह चुके हैं कि जो हथियार सार्थक मानवीय नियंत्रण से बाहर हो सकते हों, उन पर तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों की तरह सभी रोबो हथियार सहज, सुलभ तरीकों से उपलब्ध हो सकते हैं और इनका कच्चा माल हासिल करना भी मुश्किल नहीं होगा। और अंतत: यह तकनीक वैश्विक हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकती है तथा ऐसे हथियार हत्याओं जैसे काम के लिए आदर्श साबित होंगे।
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बुधवार, 12 अगस्त 2015

टेलीपैथी' तकनीक पर काम रहा है फेसबुक


मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। क्‍या हो, यदि आप अपने फेसबुक पेज की वॉल पर कुछ पोस्‍ट करने के बारे में सोचे यह वह आपके टाइप किए बगैर ही पोस्‍ट हो जाए। यह हवा-हवाई बात नहीं है, बल्कि फेसबुक के संस्‍थापक मार्क जकरबर्ग की योजना का हिस्‍सा है।
वो एक नई तकनीक पर काम कर रहे हैं। दरअसल मार्क फेसबुक को टेलीपैथी से जोड़ना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि लोगों को अपने फेसबुक पेज पर कुछ भी पोस्‍ट करने, लाइक करने या शेयर करने के लिए कम्‍प्‍यूटर, लैपटॉप, स्‍मार्टफोन या टैबलेट की जरूरत ही न पड़े। यह सब केवल सोचने से हो जाए।
मार्क अपने फेसबुक पेज पर नियमित रूप से लोगों के सवालों के जवाब देते हैं। हाल ही में उनसे एक सवाल पूछा गया कि भविष्‍य का फेसबुक कैसा होगा। इस पर उन्‍होंने अपनी टेलीपैथी योजना के बारे में बताया।
मार्क के मुताबिक वो चाहते हैं कि लोग अपनी भावनाओं को टेलीपैथी के जरिए फेसबुक पर शेयर कर सकें। इसके लिए काफी उन्‍नत तकनीक की जरूरत पड़ेगी, जिस पर कंपनी रिसर्च कर रही है।
उन्‍होंने बताया कि इसके लिए अत्‍यधिक उन्‍नत तकनीक के साथ ही खास किस्‍म के डिवाइसेस की जरूरत भी पड़ेगी, जो इंसानी भावनाओं तथा विचारों को शब्‍दों की शक्‍ल देकर फेसबुक वॉल पर पोस्‍ट कर सके।
गौरतलब है कि हाल ही में भारत में फेसबुक यूजर्स की संख्‍या 12.5 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। वहीं पूरी दुनिया में यह आंकड़ा अरबों में पहुंच चुका है
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बेंगलुरू में बन रहा ऐसा रोबोट, 'मां' जैसा रखेगा ख्याल




बेंगलुरू। जिस तरह मां अपने बच्चे का पूरा ख्याल रखती है, उसी तरह भारत में अनोखा रोबोट बन रहा है, जो अपने मालिक की हर जरूरत को पूरा करेगा। बेंगलुरू स्थित तकनीकी फर्म नोशन इंक ने इस 'मदर' रोबोट को ईव नाम दिया है। यह 2018 से बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। इसमें आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस होगी, यानी यह अपने दिमाग का इस्तेमाल कर सकेगा। कंपनी के सीईओ रोशन श्रवण के अनुसार, ईव में मातृत्व का भाव है।
ऐसा होगा यह अनोखा रोबोट
  • ईव का आकार गोल और वजन करीब 100 ग्राम है।
  • यह मशीन 15 मिनट तक उड़ान भरकर 2 किमी दूरी तय करने की क्षमता रखती है।
  • आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस की मदद से यह इनसानों की तरह रोज-रोज के कामों और संदर्भों को समझ सकता है।
  • आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस का फायदा यह होगा कि आम इनसान भी इस मशीन से बात करके अपनी जरूरत के अनुसार एप्लिकेशन बना सकेंगे। उन्हें लंबे प्रोग्राम लिखने की जरूरत नहीं होगी।
  • कंप्युटर के साथ बात करने की कोडिंग की समस्याएं यहां हल कर ली गई हैं।
  • डिवाइस में इसके मालिक के जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी होगी, लेकिन इसे कहीं साझा नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह मशीन किसी सर्वर से नहीं जुड़ी होगी।
  • ईव से जुड़े दो अहम पहलुओं - मुवमेंट और विजन पर माइक्रोसॉफ्ट काम कर रहा है।
  • इसमें मल्टीपल रोटेटिंग कैमरे होंगे। इनकी मदद से 360 डिग्री विजन प्राप्त हो सकेगा।
  • कोई आपको विजिटिंग कार्ड देता है तो यह उसका विवरण अपनी मेमोरी में फीड कर लेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत बता देगा।
  • आप कार चला रहे हैं तो यह डैशबोर्ड पर बैठकर हर हलचल को रिकॉर्ड करेगा।
अभी कांच को नहीं समझ पाती है ईव
श्रवण ने बताया कि अभी कुछ तकनीकी खामियों पर काम किया जा रहा है। मसलन- यह रोबोट अभी यह नहीं समझ पा रहा है कि कांच के आरपास नहीं जाया जा सकता है। कोशिश की जा रही है कि यह रोबोट अपने-आप खुद को चार्ज भी कर ले।
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तकनीकी का जादू








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शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

बुढ़ापे का इलाज रोबॉट्स टेक्नॉलजी

50 सालों में रोबॉट्स से सेक्स करने लगेंगे इंसान, प्यार में भी पड़ सकते हैं: एक्सपर्ट


इंसान जल्द ही रोबॉट्स के साथ यौन संबंध बना सकेंगे। यह दावा एक वैज्ञानिक ने किया है। उनका कहना है कि आने वाले 50 सालों के अंदर रोबॉट से सेक्स हकीकत बन जाएगा।

यूनिवर्सिटी ऑफ संडरलैंड से ताल्लुक रखने वालीं डॉक्टर हेलन ड्रिस्कल ने कहा कि टेक्नॉलजी अडवांस होने से मशीनों के साथ हमारे इंटरैक्ट करने का तरीका भी बदल जाएगा। सेक्स की साइकॉलजी और रिलेशनशिप का ज्ञान रखने वालीं डॉक्टर ड्रिस्कल ने कहा, 'सेक्स टेक्नॉलजी तेजी से प्रगति कर रही है और 2070 तक शारीरिक रिश्ते बनने लगेंगे।'

डॉक्टर ने कहा, 'आप अभी से ही ऑनलाइन एक इंसान जैसे सेक्स टॉय को ऑर्डर कर सकते हैं। आने वाले सालों में रोबॉटिक, मोशन सेसिंग और इंटरैक्टिव टेक्नॉलजी और बेहतर हो जाएगी। इस टेक्नॉलजी की मदद से ये पुतलों जैसे सेक्स टॉय जिंदा हो जाएंगे।'

डॉक्टर ड्रिस्कल ने कहा, 'हो सकता है कि लोग अपने वर्चुअल रिऐलिटी पार्टनर्स से मोहब्बत करने लगें।' गौरतलब है कि हाल ही में आई फिल्म 'हर' (Her) में भी इस विषय को उठाया गया था, जिसमें कैरक्टर ऑपरेटिंग सिस्टम से प्यार करने लगता है।

डॉक्टर ने कहा, 'बहुत संभव है कि लोग अपने ऐसे रोबॉट पार्टनर से प्यार करने लगें। क्योंकि लोग तो कई बार ऐसे काल्पनिक पात्रों से प्यार करने लगते हैं, जिनसे वे कभी मिल नहीं सकते।'

इस कंपनी को अब रोबॉट ही चलाएंगे

अब तक हम यह कल्पना ही करते रहे हैं कि एक दिन इंसान के सभी काम रोबॉट करेगा, लेकिन चीन में यह सच होने वाला है। चीन के दोंगगुयान की कंपनी शानगियिंग प्रिसिसन टेक्नॉलजी में किसी भी काम के लिए आने वाले दिनों में इंसान की जरूरत ही नहीं होगी । एक वर्कशॉप के दौरान सेलफोन बनाने वाली कंपनी ने बताया कि 10 प्रॉड्क्शन लाइनस में 60 रोबॉट तैनात किए गए हैं। हर लाइन में सिर्फ तीन कर्मचारी काम की चेकिंग के लिए रखे गए हैं।

लेकिन आने वाले दिनों में कंपनी में ट्रकों का संचालन, वेयरहाउसिंग और मशीनरी काम समेत सारा काम कंप्यूटर द्वारा संचालित रोबॉट्स के जरिए ही होगा। इन रोबोटों को दिशानिर्देश देने के लिए कुछ ही इंसानी कर्मचारियों की जरूरत होगी। टेक्निकल स्टाफ के लोग अपनी सीट पर बैठे ही सेंट्रल कंट्रोल सिस्टम के जरिए कंपनी के पूरे काम पर निगरानी रखेंगे।

पीपल्स डेली के मुताबिक कुछ महीने पहले कंपनी में पूरे काम के लिए 650 कर्मचारी थे, लेकिन एक रोबॉट छह से आठ लोगों तक का काम कर सकता है। ऐसे में फिलहाल कंपनी में सिर्फ 60 कर्मचारी ही बचे हैं। शानगियिंग प्रिसिसन टेक्नॉलजी के जनरल मैनेजर लुओ विकियांग ने बताया कि आने वाले दिनों में हमें सिर्फ 20 लोगों की ही जरूरत होगी।

कंपनी के प्रेसिडेंट शेन किक्सिंग के मुताबिक यह 'रोबॉट रिप्लेस ह्यूमन प्रोग्राम' का पहला चरण है। भविष्य में कंपनी में रोबॉट्स की संख्या 1,000 के करीब होगी और कंपनी का 80 फीसदी काम रोबोट के जरिए ही होगा। प्रशिक्षित कर्मियों के मुकाबले यह रोबॉट काफी तेजी से काम कर सकेंगे। कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक रोबॉट्स को काम पर लगाए जाने के बाद से डिफेक्ट रेट में काफी कमी आई है। इसके अलावा प्रॉडक्शन भी आठ हजार पीस से बढ़कर 21 हजार तक जा पहुंचा है।

इंसानों के साथ भी शारीरिक रिश्ते बना सकेंगे रोबॉट, पैदा करेंगे बच्चे!


दन
आपने रजनीकांत की रोबॉट फिल्म तो देखी होगी। इसमें रोबॉट बने रजनीकांत का उसके साथी मजाक बनाते हैं कि वह सेक्स नहीं कर सकता, इसलिए वह इंसानों जैसा नहीं है। लेकिन जरा सोचिए क्या हो, अगर रोबॉट भी सेक्स करने लगें और बच्चे पैदा करने लगें। हालांकि इंजीनियर और नोवेलिस्ट जॉर्ज जैरकैडाकिस का मानना है कि अगले 20-30 साल में ऐसा संभव है। जॉर्ज के मुताबिक, भविष्य में रोबॉट न सिर्फ दूसरे रोबॉट के साथ सेक्स कर सकेंगे, बल्कि इंसानों के साथ भी शारीरिक रिश्ते बना सकेंगे।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस इंजीनियर जॉर्ज का मानना है कि ऐसा करने से बेहतर रोबॉट पैदा होंगे। उनके मुताबिक, रोबॉट के इंसानों के साथ संबंध बनाने से हाइब्रिड प्रजाति विकसित होगी। रोबॉट और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञों के अनुसार, यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि वर्तमान में ही ऐसे रिसर्च और तकनीक उपलब्ध हैं, जिससे ऐसा संभव हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों को भी इसके बुरे प्रभाव को लेकर चिंता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर रोबॉट इंसानों से ज्यादा पैदा होने लगे, तो वह समय बुरे सपने से कम नहीं होगा।

बच्चे पैदा नहीं, प्रिंट होंगे: रोबॉट के विकास से जुड़े वैज्ञानिकों की अगर मानें तो यह रोबॉट बच्चे पैदा नहीं प्रिंट करेंगे। शेफील्ड यूनिवर्सिटी के आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और रोबॉटिक्स के प्रफेसर नोएल शार्की के अनुसार, रोबॉट 3-डी तकनीक का इस्तेमाल कर बच्चों को जन्म दे सकते हैं। नोएल के अनुसार, रोबॉट अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव लाकर सेक्स के दौरान अपनी खूबियों को बढ़ा या एक्सचेंज कर सकते हैं। उनके बच्चों में इन खूबियों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। इन रोबॉट के पास कार्बन और सिलिकन से बना डिजिटल दिमाग होगा।


वायरस से भी होगी सुरक्षा: विशेषज्ञों का तो यहां तक मानना है कि रोबॉट द्वारा सेक्स करने से उनके सॉफ्टवेयर वायरस से भी बचे रहेंगे। ठीक उसी तरह जैसे सेक्स करने से मनुष्यों को कई संक्रमित बीमारियां नहीं होतीं।

बुढ़ापे का इलाज: वैज्ञानिकों के अनुसार इन रोबॉट-इंसानों के हाइब्रिड की दिशा में हो रही रिसर्च से बुढ़ापे के बारे में भी और जानकारी मिल सकती है। यह रिसर्च इंसानी शरीर को जानने की दिशा में लाभदायक होगी और यह जाना जा सकेगा कि बुढ़ापे के लिए जिम्मेदार अल्टशाइमर्त्स बीमारी का असर इंसानी दिमाग पर किस तरह और कितना होता है। प्रफेसर वार्विक ने कहा कि रोबॉट का एक दूसरे से सेक्स करना और रोबॉट पैदा करना सामाजिक स्वीकार्यता पर भी निर्भर करेगा। 20 साल के बाद जब यह पूरी तरह से संभव हो जाएगा तब इस तकनीक को स्वीकार करने मे नैतिक दिक्कते आएंगी। वैसे वैज्ञानिकों की इस रिसर्च से काफी उम्मीदें हैं। वैज्ञानिका जॉर्ज डायसन का मानना है कि ऐसे रोबॉट शनि के चांद एनक्लेडस से मंगल ग्रह पर बर्फ लाने में मदद कर सकते हैं।

गुजरात में बनाया जा रहा सुपर ह्यूमन 'रजनीकांत'

रजनीकांत के सुपर ह्यूमन जोक्स अब रिऐलिटी में तब्दील होने वाले हैं। फिल्म 'रोबॉट' में रजनीकांत के एक ख्वाब को जल्द ही आप जल्द ही साकार होते देखेंगे। देश का पहला सुपर ह्यूमन रोबॉट लैब से निकलकर असली दुनिया में कदम रखने वाला है।

गुजरात फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी का दावा है कि यहां देश का पहला इंटरैक्टिव और मल्टी परपस रोबॉटिक सूट और रोबॉट बनाया जा रहा है, ठीक वैसा ही जैसा रजनीकांत की फिल्म में आपने देखा था। इस रोबॉटिक सूट को पहनकर कोई भी इंसान 200 किलोग्राम का वजन भी आसानी से उठा सकेगा।

दरअसल, इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेविरल साइंस और गुजरात फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी का रिसर्च सेंटर एक्सॉनेट साथ मिलकर एक ऐसे प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसका नाम बायोरोबॉटिक्स रखा गया है।

गुजरात फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का कहना है कि प्रोटोटाइप तैयार किया जा चुका है। अब इसके ब्रेन इंटरफेस और सिक्यॉरिटी सिस्टम पर काम किया जा रहा है। उनका मानना है कि पिछले साल शुरू हुआ यह प्रॉजेक्ट 2017 तक पूरा कर लिया जाएगा। योजना यह भी कि डीआरडीओ के साथ मिलकर भविष्य में इसका इस्तेमाल डिफेंस सेक्टर को भी मजबूत करने के लिए किया जाए।

क्या है यह रोबॉट
दरअसल, इन रोबॉटिक सूट्स या फ्रेम्स को 'एक्सोस्केलिटन' कहते हैं और इसमें लगे मोटर्स और अत्याधुनिक सेंसर्स किसी भी इंसान की क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। अगर आपने हॉलिवुड फिल्म 'आयरनमैन' देखी है, तो यह सूट काफी हद तक वैसा ही होगा। ये रोबॉट्स न सिर्फ देखेंगे, बल्कि इनमें सुनने और समझने की भी क्षमता होगी।

किन कामों में होगा मददगार
इन सूट्स और रोबॉट्स की मदद रोजाना के काम में तो लिया ही जा सकेगा, साथ ही ये भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय फायरफाइटर्स का काम भी करेंगे। इसके अलावा, केमिकल लीक पर काबू पाने के लिए और बम डिस्पोज करने में भी इनकी मदद ली जा सकेगी। इतना ही नहीं, इनका इस्तेमाल अस्पतालों, फैक्ट्रियों और घरों में भी किया जा सकेगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि रोबॉटिक सूट्स को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लंबी सर्जरी करने वाले डॉक्टर्स इसे पहनकर आसानी से बिना थके सर्जरी कर पाएंगे।


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