मंगलवार, 27 जनवरी 2015

जब सबको पता होगा हमारे बारे में

कल्पना कीजिए एक दुनिया की जहां निजता जैसी कोई चीज नहीं होगी. मच्छर के साइज का एक रोबोट आए और बिना किसी अदालती आदेश के आपका डीएनए चुरा ले जाए. ऐसा कुछ सच होने वाला है. शुरुआत हो चुकी है.
आप खरीदारी के लिए जाएं और दुकानों को पहले से ही पता हो कि आपकी खरीदने की आदतें कैसी हैं. भविष्य की दुनिया की ऐसी कई तस्वीरें हार्वर्ड के कुछ प्रोफेसरों ने दावोस के विश्व आर्थिक फोरम में खींची. यहां दुनिया भर से आए राजनीतिक और आर्थिक जगत के चोटी के प्रतिनिधियों को बताया गया कि अब व्यक्तिगत निजता जैसी कोई धारणा नहीं रही. हार्वर्ड के कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर मार्गो सेल्टजर ने कहा, "आपका आज में स्वागत है. हम उस दुनिया में पहुंच चुके हैं. जिस निजता को हम अब तक जानते आए हैं, वह अब संभव नहीं है."
जेनेटिक्स के क्षेत्र में शोध करने वाले एक अन्य हार्वर्ड प्रोफेसर सोफिया रूस्थ ने कहा कि इंसान की व्यक्तिगत जेनेटिक सूचना का सार्वजनिक क्षेत्र में जाना अब अपरिहार्य हो गया है. रूस्थ ने बताया कि खुफिया एजेंटों को विदेशी राजनेताओं की जेनेटिक जानकारी चुराने को कहा जा रहा है ताकि उनकी बीमारियों और जिंदा रहने के समय के बारे में पता चल सके. ये जानकारियां राजनीति को निर्धारित कर सकती हैं. ऐसे सोचिए कि अगर तब मोहम्मद अली जिन्ना की बीमारी के बारे में पता होता तो शायद भारत का विभाजन नहीं होता.
जेनेटिक जानकारियां लोगों के लिए समस्या भी पैदा कर सकती हैं. सेल्टजर एक ऐसे विश्व की कल्पना करती हैं जहां सरकारों या इंश्योरेंस कंपनियों के मच्छर के आकार वाले रोबोट लोगों का डीएनए जुटाएगें या चुराएंगे. इस तरह निजता का हनन आम बात हो जाएगा. सेल्टजर कहती हैं, "ऐसा नहीं है कि यह होगा, ऐसा हो रहा है, हम आज जासूसी करने वाले राज्य में रह रहे हैं."
राजनीतिशास्त्री जोसेफ नाय ने कंप्यूटर में जानकारी को इंक्रिप्ट करने और सरकार को हर सूचना को देखने की अनुमति देने पर चल रही बहस के बारे में कहा, "सरकारें संचार में पिछला दरवाजा खुला रखने की बात कर रही हैं ताकि आतंकवादी जासूसी होने के डर के बिना संवाद न कर सकें." नाय ने कहा कि समस्या यह है कि अगर सरकारें ऐसा कर सकती हैं तो अपराधी भी कर सकते हैं. उन्होंने सवाल पूछा, "आप किससे ज्यादा चिंतित हैं, बिग ब्रदर से या बदमाश चचेरे भाई से?"
भविष्य की इस निराशावादी तस्वीर के बावजूद संतोष की बात यह है कि तकनीक इंसान को जितना खतरा पहुंचा रही है, उससे ज्यादा फायदा भी दे रही है. भविष्य के मुद्दों पर शोध करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का सकारात्मक पहलू निजताओं के हनन से कहीं ज्यादा है.
एमजे/आरआर (वार्ता) sabhar :http://www.dw.de/

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