Vigyan India.com (विज्ञान इंडिया डाट कॉम ): गूगल ड्रोन बदल देंगे दुनिया

गूगल ड्रोन बदल देंगे दुनिया

गूगल की गुप्त रिसर्च लैब ऐसे ड्रोन डिजाइन करने की कोशिश कर रही है जो शहर के यातायात से बचते हुए लोगों तक माल तेजी से पहुंचा दे. इंटरनेट कंपनी गूगल ग्लास और स्मार्ट वॉच बाजार में पेश कर चुकी है.
USA Google
महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की घोषणा के बाद गूगल और अमेजन डॉट कॉम में तकनीकी रेस और तेज हो जाएगी. अमेजन कुछ महीनों पहले से ड्रोन के जरिए ग्राहकों तक पैकेट पहुंचाने का प्रयोग कर रहा है. अमेजन अमेरिका की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी है. ऑनलाइन वीडियो, डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्र में अमेजन गूगल के सामने बड़ी चुनौती है. इस रेस में एप्पल भी शामिल है.
गूगल ने अपने ड्रोन बिजनेस को प्रोजेक्ट विंग नाम दिया है. हालांकि गूगल को उम्मीद है कि ड्रोन के बेड़े को पूरी तरह से तैयार होने में कई साल लगेंगे, कंपनी का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में ड्रोन ने टेस्ट फ्लाइट्स में फर्स्ट एड किट, चॉकलेट और दो किसानों को पानी पहुंचाया. हवाई प्रौद्योगिकी में महारत हासिल करने के साथ ही गूगल और अमेजन को कई देशों में ड्रोन उड़ाने के लिए सरकारी इजाजत चाहिए होगी.
अमेरिकी कंपनी अमेजन ने देश के संघीय उड्डयन प्रशासन से ड्रोन परीक्षण के विस्तार की इजाजत मांगी थी, प्रशासन फिलहाल शौकिया ड्रोन उड़ाने वालों और मॉडल एयरक्राफ्ट बनाने वाले को ड्रोन उड़ाने की इजाजत देता है. लेकिन व्यावसायिक इस्तेमाल पर ज्यादातर प्रतिबंध ही है.
प्रोजेक्ट विंग गूगल की एक्स लैब से निकलने वाला सबसे ताजा प्रोजेक्ट है, इसी लैब से बिना स्टीयरिंग वाली कार भी निकली है. यही नहीं इसी लैब में गूगल ग्लास भी तैयार हुआ है. लेकिन समय समय पर निजता के हनन पर गूगल ग्लास आलोचना झेलता रहा है.
ड्रोनों की मदद से गूगल अपनी वर्तमान सेवा को विस्तार दे सकता है. इनके जरिए ऑनलाइन चीजें खरीदने वालों को ऑर्डर के ही दिन माल मिल जाएगा. गूगल अभी भी सैन फ्रांसिस्को, लॉस एजेंल्स के और न्यूयॉर्क के कुछ हिस्सों में कारों के जरिए उसी दिन माल पहुंचाने की सेवा मुहैया करवा रहा है. प्रोजेक्ट विंग के बारे में गूगल ने अपनी किताब में लिखा, "भेजे जाने वाले सामान के लिए खुद उड़ने वाले ड्रोन एकदम नया दृष्टिकोण सामने लाएंगे. आज मौजूद सेवाओं की तुलना में इसमें ऐसे विकल्प होंगे जो तेज, सस्ते, कम बर्बादी करने वाले और पर्यावरण के लिए संवेदनशील होंगे."
sabhar :http://www.dw.de/

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