शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

कैसे होंगे भविष्य के स्मार्ट शहर

भविष्य के शहर के निर्माण में तकनीक के इस्तेमाल पर बढ़ रहा है जोर
दुनियाभर में नए शहर बसाए जा रहे हैं और जिन शहरों में हम सदियों से रह रहे हैं उन्हें सुधार कर भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है.
ऐसा तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और बढ़ते प्रदूषण के जवाब में हो रहा है. साथ ही पूरे शहर को एक साथ वेब नेटवर्क पर जोड़ना भी नए शहर बसाने और पुराने शहरों के नवीनीकरण का एक प्रमुख कारण है.

वहीं कुछ शहर स्मार्ट होने का मकसद शहरों को और हरा-भरा और पर्यावरण को कम दूषित करना है.स्मार्ट शहर का मतलब ये हो सकता है कि डेटा की मदद से ट्रैफिक में जाम से बचा जा सके, या फिर निवासियों को बेहतर सूचना देने के लिए विभिन्न सेवाओं को एक साथ जोड़ देना.
तकनीकी कपंनी जैसे आईबीएम और सिस्को स्मार्ट शहरों में अपने लिए व्यवसाय का ज़बर्दस्त मौका देख रहीं हैं.
आईए जानते हैं, दुनियाभर में चर्चा में रहने वाले ऐसे स्मार्ट शहरों के प्रोजेक्ट के बारे में.

सॉन्गडो, दक्षिण कोरिया

कई लोगों के लिए सॉन्गडो स्मार्ट शहरों का सरताज है. येलो सी समुद्री तट पर इस शहर को बसाने का काम वर्ष 2005 में शुरु हुआ और इस पर 35 बिलियन डॉलर का खर्च होगा.
इस शहर की खासियत ये है कि पूरा शहर एक सूचना प्रणाली से जुड़ा है जिसकी वजह से इसे 'बक्से में बंद शहर' भी कहते हैं.
सॉन्गडो में सभी चीज़ों में इलेक्ट्रॉनिक सेंसर लगा हुआ है. जैसे स्वचालित सीढ़ियां, यानी एस्केलेटर, तभी चलेंगे जब उनपर कोई खड़ा होगा.
सभी घरों में टेलिप्रेजेंस सिस्टम लगाया गया है. साथ ही घर के ताले, घर को गर्म रखने के लिए हीटिंग प्रणाली आदि सभी पर इ-नेटवर्क के ज़रिए कंट्रोल रखा जा सकता है.
यहां तक की स्कूल, अस्पताल और दुसरे सरकारी दफ्तर भी नेटवर्क पर हैं.
तकनीक की दृष्टि से ये शहर बेमिसाल है लेकिन ज़रूरी नहीं कि इसलिए लोगों के लिए भी आदर्श शहर ही साबित हो.
इस शहर को तकनीक सिस्को दे रही है और ये साल 2015 तक पूरा हो जाएगा जिसके बाद यहां 65,000 लोग रह सकेंगे और 300,000 लोग यहां काम पर आएंगे.

मास्दार, संयुक्त अरब अमीरात

अरबी भाषा में मास्दार का मतलब स्रोत होता है.
ये शहर अबू धाबी के रेगिस्तान के बीचों-बीच बसाया जा रहा है.
इसे धरती पर सबसे ज्यादा संवहनीय या सस्टेनेबल और दीर्घकालिक शहर के रुप में बसाया जा रहा है.
शहर में सौर्य उर्जा और वायु उर्जा के संयंत्र लगे हैं जिससे प्रदूषण कम से कम हो.
शहर को गाड़ियों से मुक्त रखा गया है. यहां कोई कार नज़र नहीं आएगी बल्कि आवाजाही के लिए बिजली से चलने वाली बिना ड्राइवर की गाड़ियां बनाई जा रही हैं.
इस शहर में 40,000 लोग रह सकेंगे. लेकिन इसे बनाने की कीमत कई बिलियन डॉलरों में आंकी जा रही है जिससे आलोचकों का कहना है कि दूसरी जगह ऐसा शहर बसाना आसान नहीं होगा.

रियो डे जेनेरो, ब्राज़ील

रियो साल 2014 में फुटबॉल विश्व कप और 2016 में ओलंपिक की मेज़बानी करेगा. जाहिर है दुनिया की नज़र इस शहर पर रहेगी, और उसके लिए खास तैयारी हो रही है.
शहर के तीस एजेंसियों को एक नेटवर्क पर जो़डा गया है जिससे किसी भी स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.
आईबीएम ने मौसम के पूर्वानुमान के लिए जटिल प्रणाली तैयार की है. मौसम औऱ ट्रैफिक आदि के लिए विशेष ऐप बनाए जा रहे हैं.
लेकिन इस शहर में सब कुछ कॉरपोरेट के नेतृत्व में नहीं हो रहा है.
रियो की झोपड़पट्टियों में आम लोग एक ऐसा प्रोजेक्ट चला रहे हैं जिसके तहत वहां रहने वाले अपने घरों को नई तरह से बना सके.
घरों के डिज़ाइन और उन्हें बनाने के आसान तरीके इंटरनेट पर उपलब्ध कराए गए हैं और लोगों से कहा जा रहा है कि वो अपने डिज़ाइन भी इंटरनेट पर लगाए.
इस प्रोजेक्ट का आदर्श है कि घर बनाने में अगर सभी लोग योगदान दे, तो फिर वो शहर कैसा होगा.

बार्सिलोना, स्पेन

पिछले साल बार्सिलोना शहर के एक प्रमुख अधिकारी ने ये बयान देकर हलचल पैदा कर दी की आने वाले स्मार्ट शहर भविष्य में कई देशों से ज्यादा ताकतवर हो जाएंगे.
बार्सिलोना स्मार्ट शहरों का नेता बनना चाहता है और इसके लिए शहर में कई रोचक प्रोजेक्ट लागू किए जा रहे हैं.
बस के रूटों को, कचरा उठाने की प्रक्रिया को सेंसर की मदद से और सक्षम किया जा रहा है.
इसके अलावा परिवहन के लिए बिना सीधा संपर्क के पेमेंट व्यवस्था तैयार की जा रही है.

लंदन, इंग्लैंड

लंदन में कई छोटे प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है. रोमन काल का ये शहर नई टेक्नोलॉजी के लिए परीक्षण भूमि साबित हो रहा है.
इंटेल लंदन में ऐसी प्रणालियों पर प्रयोग कर रहा है जो भविष्य के शहरों में बिजली वितरण के लिए उपयोग में लाई जाएगी.
इसके अलावा सेंसरों के एक नेटवर्क पर काम चल रहा है जो वायु की गुणवत्ता, यातायात का प्रवाह, और पानी के वितरण पर निगरानी रखेगी.
लंदन के कुछ हिस्सों में वर्ष 2011 में दंगे हुए थे. उन दंगों में टॉटेनहैम इलाक़ा काफ़ी प्रभावित हुआ था.
इंजीनियरिंग सलाहकार कंपनी अरूप टॉटेनहैम इलाक़े को नया रूप देने के उद्देश्य से स्थानीय लोगों से ख़ासकर उन दंगों में शामिल लोगों से विचार विमर्श करने के बाद परियोजना बना रही है.

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