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परमात्मा और विज्ञान

मनुष्य की  इच्छा  सदियों से ये  रही है की  उसे  वह   सर्वशक्तिमान  हो  जाए  वह प्रकृति पर  विजय  प्राप्त कर ले | इसके लिए  वह परमात्मा  और  विज्ञान का सहारा  लेता  है | वह  कौन   है  कहाँ  से आया  है कहा जायेगा  मरने  के  बाद  कहा जाएगा क्या  मरने  बाद भी अस्तित्व है समस्याएं क्यों  आती  है धीरे धीरे  मनुष्य अपनी जिज्ञासा विज्ञान के माध्यम  से जानना  शुरू की ठीक यही जिज्ञासा  मेरे  मन में भी थी  किया  जो धर्म  में बताया गया है  किया वह कपोल कल्पित  है  या  उनमे  कुछ  सच्चाई भी है  इसके लिए  मैंने  एक ब्लॉग बहुत  पहले  शुरू किया था  की मानव का  विकास  विज्ञान  और अध्यात्म  के द्वारा  पर  मैंने सोचा  की पहले  विज्ञान का अध्ययन  किया जाये और उसके बाद इसे  अध्यात्म  की कसौटी  पर रखा जाए  इसके लिए मैंने विज्ञान इंडिया डॉट कॉम - अनंतवार्ता डॉट काम शुरू किया  इस साइट पे  आप को  विज्ञान और  अध्यात्म  से जुडी  रोचक  जान कारी आप  को मिलेगी  अब  बाते  विज्ञान   की   करते है  विज्ञान  अवधारणाओं  को नहीं मानता जब तक  वह  किसी तथ्य  को कसौटी  पर  परख़ नहीं   लेता  तबतक   मानता नहीं और सत्य भी  जब तक आप  किसी भी चीज को सामने  नहीं देखेंगे तो आप ही नहीं मानेंगे तो क्या  विभिन्या  धर्मो में  जो बताया गया  है  क्या वह   असत्य  है  केवल  कपोल कल्पना  नहीं ऐसा  नहीं है आध्यात्मिक बाते  जो कही गयी  है  उसे  आज विज्ञान भी सिद्द कर  रहा है | इसके लिए  हम आगे की पोस्टो में चर्चा करेंगे विज्ञान  ईश्वर को  नहीं मानता  वो  मानता है  की  पूरी प्रक्रिति एक  मशीन  है  इसके  सब कलपुर्जो  को  समझ  लेंगे  जिस  प्रकार गाडी चलाते  वैसे इसे भी ऑपरेट  कर  सकते  है |  और  अध्यात्म  कहता  है की सब कुछ परमात्मा  है  सबके भीतर भी  है  और  बहार  भी  है  साकार भी  है और निराकार भी  है विज्ञान के  तरफ  यदि बड़े बड़े वैज्ञानिक है  तो अध्यात्म  की तरफ  योगी  सन्यासी  और  विचारक जो ये  कहते  है  की सब कुछ  परमात्मा  की इच्छा पर  है   सृस्टि एक  माया  जब  परमात्मा  की इच्छा  होती है  तभी  सृष्टि का सृजन  , परमात्मा  अनंत  है उसकी इच्छा  भी अनंत   इसलिए  सृष्टियाँ  भी  अनंत  इस लिए  कहा गया है की  हरी अनंत   हरी कथा अनंता  अब विज्ञान भी  अनंत सृस्टि  की संभावना   मान  रहा  है  आगे की चर्चा  अगली   पोस्ट  में  

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