सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बेंगलुरू में बन रहा ऐसा रोबोट, 'मां' जैसा रखेगा ख्याल




बेंगलुरू। जिस तरह मां अपने बच्चे का पूरा ख्याल रखती है, उसी तरह भारत में अनोखा रोबोट बन रहा है, जो अपने मालिक की हर जरूरत को पूरा करेगा। बेंगलुरू स्थित तकनीकी फर्म नोशन इंक ने इस 'मदर' रोबोट को ईव नाम दिया है। यह 2018 से बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। इसमें आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस होगी, यानी यह अपने दिमाग का इस्तेमाल कर सकेगा। कंपनी के सीईओ रोशन श्रवण के अनुसार, ईव में मातृत्व का भाव है।
ऐसा होगा यह अनोखा रोबोट
  • ईव का आकार गोल और वजन करीब 100 ग्राम है।
  • यह मशीन 15 मिनट तक उड़ान भरकर 2 किमी दूरी तय करने की क्षमता रखती है।
  • आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस की मदद से यह इनसानों की तरह रोज-रोज के कामों और संदर्भों को समझ सकता है।
  • आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस का फायदा यह होगा कि आम इनसान भी इस मशीन से बात करके अपनी जरूरत के अनुसार एप्लिकेशन बना सकेंगे। उन्हें लंबे प्रोग्राम लिखने की जरूरत नहीं होगी।
  • कंप्युटर के साथ बात करने की कोडिंग की समस्याएं यहां हल कर ली गई हैं।
  • डिवाइस में इसके मालिक के जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी होगी, लेकिन इसे कहीं साझा नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह मशीन किसी सर्वर से नहीं जुड़ी होगी।
  • ईव से जुड़े दो अहम पहलुओं - मुवमेंट और विजन पर माइक्रोसॉफ्ट काम कर रहा है।
  • इसमें मल्टीपल रोटेटिंग कैमरे होंगे। इनकी मदद से 360 डिग्री विजन प्राप्त हो सकेगा।
  • कोई आपको विजिटिंग कार्ड देता है तो यह उसका विवरण अपनी मेमोरी में फीड कर लेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत बता देगा।
  • आप कार चला रहे हैं तो यह डैशबोर्ड पर बैठकर हर हलचल को रिकॉर्ड करेगा।
अभी कांच को नहीं समझ पाती है ईव
श्रवण ने बताया कि अभी कुछ तकनीकी खामियों पर काम किया जा रहा है। मसलन- यह रोबोट अभी यह नहीं समझ पा रहा है कि कांच के आरपास नहीं जाया जा सकता है। कोशिश की जा रही है कि यह रोबोट अपने-आप खुद को चार्ज भी कर ले।
- sabhar http://www.jagran.com/

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

vigyan ke naye samachar ke liye dekhe

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पहला मेंढक जो अंडे नहीं बच्चे देता है

वैज्ञानिकों को इंडोनेशियाई वर्षावन के अंदरूनी हिस्सों में एक ऐसा मेंढक मिला है जो अंडे देने के बजाय सीधे बच्चे को जन्म देता है.



एशिया में मेंढकों की एक खास प्रजाति 'लिम्नोनेक्टेस लार्वीपार्टस' की खोज कुछ दशक पहले इंडोनेशियाई रिसर्चर जोको इस्कांदर ने की थी. वैज्ञानिकों को लगता था कि यह मेंढक अंडों की जगह सीधे टैडपोल पैदा कर सकता है, लेकिन किसी ने भी इनमें प्रजनन की प्रक्रिया को देखा नहीं था. पहली बार रिसर्चरों को एक ऐसा मेंढक मिला है जिसमें मादा ने अंडे नहीं बल्कि सीधे टैडपोल को जन्म दिया. मेंढक के जीवन चक्र में सबसे पहले अंडों के निषेचित होने के बाद उससे टैडपोल निकलते हैं जो कि एक पूर्ण विकसित मेंढक बनने तक की प्रक्रिया में पहली अवस्था है. टैडपोल का शरीर अर्धविकसित दिखाई देता है. इसके सबूत तब मिले जब बर्कले की कैलिफोर्निया यूनीवर्सिटी के रिसर्चर जिम मैकग्वायर इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप के वर्षावन में मेंढकों के प्रजनन संबंधी व्यवहार पर रिसर्च कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें यह खास मेंढक मिला जिसे पहले वह नर समझ रहे थे. गौर से देखने पर पता चला कि वह एक मादा मेंढक है, जिसके साथ कर…

समय क्या है ? समय का निर्माण कैसे होता है?

भौतिक वैज्ञानिक तथा लेखक पाल डेवीस के अनुसार “समय” आइंस्टाइन की अधूरी क्रांति है। समय की प्रकृति से जुड़े अनेक अनसुलझे प्रश्न है। समय क्या है ?समय का निर्माण कैसे होता है ?गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से समय धीमा कैसे हो जाता है ?गति मे समय धीमा क्यों हो जाता है ?क्या समय एक आयाम है ?अरस्तु ने अनुमान लगाया था कि समय गति का प्रभाव हो सकता है लेकिन उन्होने यह भी कहा था कि गति धीमी या तेज हो सकती है लेकिन समय नहीं! अरस्तु के पास आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत को जानने का कोई माध्यम नही था जिसके अनुसार समय की गति मे परिवर्तन संभव है। इसी तरह जब आइंस्टाइन साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के विकास पर कार्य कर रहे थे और उन्होने क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा था कि द्रव्यमान के प्रभाव से अंतराल मे वक्रता आती है। लेकिन उस समय आइंस्टाइन  नही जानते थे कि ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है। ब्रह्माण्ड के विस्तार करने की खोज एडवीन हब्बल ने आइंस्टाइन द्वारा “साधारण सापेक्षतावाद” के सिद्धांत के प्रकाशित करने के 13 वर्षो बाद की थी। यदि आइंस्टाइन को विस्तार करते ब्रह्माण्ड का ज्ञान होता तो वे इसे अपने साधारण …

वैज्ञानिकों ने विकसित किया इलेक्ट्रॉनिक पौधा, विज्ञान के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत

लंदन: वैज्ञानिकों ने पौधे के संवहन तंत्र में सर्किट लगाकर एक इलेक्ट्रॉनिक पौधे का निर्माण किया है। इससे विज्ञान के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत हो सकती है।