सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मिला हमेशा जवान रहने का नुस्खा

एक प्रोफेसर का दावा है कि उसने दक्षिण जापान के लोगों की लंबी उम्र का राज ढूंढ निकाला है. यह राज एक खास पौधे के अर्क में छुपा है, जिसे स्थानीय लोग "गेटो" के नाम से जानते हैं.
ओकिनावा की रियूक्यूस यूनिवर्सिटी में कृषि विज्ञान के प्रोफेसर शिंकिचि तवाडा ने दक्षिण जापान के लोगों की लंबी उम्र का राज ढूंढ निकाला है. तवाडा को विश्वास है कि गहरे पीले-भूरे से रंग का दिखने वाला एक खास पौधे "गेटो" का अर्क इंसान की उम्र 20 फीसदी तक बढ़ा सकता है. तवाडा कहते हैं, "ओकिनावा में कई दशक से लंबी उम्र तक जीने का दर दुनिया में सबसे ज्यादा रहा है और मुझे लगता है कि इसका कारण जरूर यहां के परंपरागत खान पान में ही छुपा है."
काइको उहारा 64 साल की हैं लेकिन अपनी उम्र से कहीं कम की दिखती हैं. इसका राज वह गेटो को बताती हैं. काइको अपनी दुकान में ऐसे सौंदर्य उत्पाद भी बेचती हैं जिनमें गेटो ही मुख्य घटक होता है, "मैं गेटो का काढ़ा पीती हूं, जो मुझे तरो ताजा कर देता है, और मैं इस पौधे के अर्क को पानी में घोल कर लगाती हूं जिससे झुर्रियां भी कम होती हैं."
दक्षिण जापान में जीते हैं लोग काफी लंबी उम्र
पौधे में छुपा है रहस्य
तवाडा पिछले 20 साल से अदरक के परिवार के एक खास पौधे का अध्ययन कर रहे हैं जिसे स्थानीय लोग "गेटो" के नाम से जानते हैं. इसे विज्ञान की भाषा में एल्पिनिया जेरूंबेट, पिंक पोर्सिलेन लिली या शेल जिंजर के नाम से भी जाना जाता है. तवाडा को लगता है कि उनके इतने लंबे शोध का फल अब मिल गया है. कुछ समय पहले ही कीड़ों पर किये एक प्रयोग में उन्हें उत्साहजनक नतीजे मिले जब उन्होंने देखा कि जिन कीड़ों को रोज गेटो की खुराक दी जा रही थी, उनकी उम्र अन्य कीड़ों के मुकाबले 22.6 प्रतिशत ज्यादा रही.
बड़ी हरी पत्तियों, लाल फलों और सफेद फूलों वाला यह पौधा सदियों से ओकिनावा के खानपान का खास हिस्सा रहा है और अब भी जंगली पौधे की तरह उगता है. तवाडा कहते हैं कि पहले लोगों को भले ही यह नहीं पता था कि इसमें रेसवेराट्रॉल नाम का एंटीऑक्सिडेंट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. लेकिन वे यह जरूर जानते थे कि यह पौधा उनकी सेहत के लिए फायदेमंद है. तकाडा बताते हैं, "परंपरागत रूप से ओकिनावा के लोग जानते थे कि जाड़ों में बनाया जाने वाला एक खास व्यंजन, मुची, जिसे चावल के पेस्ट को गेटो की पत्ती में लपेट कर बनाया जाता था, सर्दी से बचाने के साथ साथ ताकत भी देती थी."
दुनिया का सबसे बुजुर्ग आदमी जापान का है
'फास्ट फूड की बढ़ती ललक'
लेकिन ओकिनावा में भी चीजें बहुत बदल गई हैं. परंपरागत खानपान की चीजें जिसमें स्थानीय सब्जियों, मछलियों और समुद्री शैवालों की अधिकता होती थी, उनकी जगह अब स्टेकहाउस और बर्गर बेचने वाली दुकानें लेती जा रही हैं. ओकिनावा द्वीप समूह की राजधानी नाहा की सड़कें ऐसी दुकानों से भरती जा रही हैं.
ओकिनावा की महिलाएं आज भी बहुत लंबा जीवन जी रही हैं. सत्तासी साल की औसत आयु वाली इन महिलाओं की जीने की दर अब भी जापान में सबसे लंबी उम्र की सूची में काफी ऊपर है. लेकिन पुरूष 79.4 वर्ष की औसत आयु के साथ इस सूची में नीचे आ गए हैं और राष्ट्रीय औसत से भी कम है. और तो और इस द्वीप समूह में पुरूषों में मोटापे की दर जापान में सबसे ऊंची है. तवाडा कहते हैं, "आजकल लोग फास्टफूड बहुत खाते हैं, लंबे जीवन की प्रत्याशा कम हो रही है. समय आ गया है कि अपने क्षेत्र के खानपान की परंपराओं से दुबारा जुड़ा जाए."
गेटो का बढ़ता कोरोबार
गेटो के स्वास्थ्य से जुड़े फायदे धीरे धारे लोगों को पता चल रहे हैं. तवाडा के रिसर्च के इर्द गिर्द एक पूरा कुटीर उद्योग विकसित हो रहा है. शहर के थोड़ा बाहर इसामु कीना ने पूरे खेत में गेटो उगाया है. उनकी कंपनी रिच ग्रीन इस क्षेत्र में गेटो की सबसे बड़ी उत्पादक है. इसामु कहते हैं, "हमें ओकिनावा पर सीमित रहने की कोई जरूरत नहीं है. हम इसे दुनिया के कोने कोने तक पहुंचाना चाहते हैं."
वहीं अपनी प्रयोगशाला में काम करते तवाडा को लगता है कि लोगों ने अब इस पौधे के महत्व को समझना शुरू कर दिया है. उन्हें लगता है कि आने वाले समय में यह ओकिनावा और पूरी दुनिया को भी काफी बदल देगा, "आज गेटो का इस्तेमाल सिर्फ सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. लेकिन यह इसका सिर्फ एक उपयोग है और मुझे लगता है कि जल्द ही गेटो का इस्तेमाल दवाइयों और अन्य क्षेत्रों में होने लगेगा. मैं उम्मीद करता हूं कि एक दिन गेटो पूरे द्वीप की अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाएगा."
आरआर/आईबी (एएफपी)

sabhar :http://www.dw.de/

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

vigyan ke naye samachar ke liye dekhe

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

30 सेकंड के फर्क ने मिटा दिया था डायनसोर युग का वजूद

डायनासोर युग के अंत के लिए कहा जाता है कि एक बहुत बड़ा ऐस्टरॉइड धरती से टकराया था जिससे पैदा हुए विस्फोट ने इन विशालकाय जानवरों का वजूद खत्म कर दिया। लेकिन इस विस्फोट की टाइमिंग को लेकर बीबीसी की एक डॉक्युमेंट्री में बहुत दिलचस्प तथ्य सामने आया है। द डे डायनासोर डाइड नाम की इस डॉक्युमेंट्री में बताया गया है कि जिस ऐस्टरॉइड ने डायनासोरों का अंत किया, अगर वह धरती से 30 सेकंड जल्दी (पहले) या 30 सेकंड देर (बाद) से टकराता तो उसका असर जमीनी भूभाग पर इतना कम होता कि डायनासोर खत्म नहीं होते। ऐसा इसलिए क्योंकि 30 सेकंड की देरी या जल्दी गिरने की स्थिति में वह जमीन की बजाय समुद्र में गिरता।

यह ऐस्टरॉइड 6.6 करोड़ साल पहले मेक्सिको के युकटॉन प्रायद्वीप से टकराया था जिससे वहां 111 मील चौड़ा और 20 मील गहरा गड्ढा बन गया था। वैज्ञानिकों ने इस गड्ढे की जांच की तो वहां की चट्टान में सल्फर कम्पाउन्ड पाया गया। ऐस्टरॉइट की टक्कर से यह चट्टान वाष्प में बदल गई थी जिसने हवा में धूल का बादल बना दिया था। इसके परिणामस्वरूप पूरी धरती नाटकीय रूप से ठंडी हो गई और पूरे एक दशक तक इसी स्थिति में रही। उन हालात में अधिकत…

स्मरण शक्ति में सुधार

बहुत अधिक संख्या में ऐसे लोग हैं जो प्राय: अपनी कमजोर स्मरण क्षमता को लेकर चिंतित रहते हैं। जब वे किसी का पक्ष या सामने वाले व्यक्ति का नाम तक भूल जाते हैं तो उन्हें और भी बुरा लगता है। ऐसा उनके साथ भी होता है, जिनके पास पहले अच्छी स्मरण शक्ति थी। हमें याद रखना चाहिए कि स्मरण शक्ति एक बैंक की तरह है। यदि इसमें कुछ डालेंगे, तभी तो निकाल सकेंगे। यह मान कर चलें कि आपकी स्मरण शक्ति तीव्र है, स्वयं से सकारात्मक अपेक्षा रखें। यदि मानेंगे कि आपका दिमाग काम नहीं करता, याददाश्त हाथ से निकल गई है तो दिमाग भी यही मानने लगेगा। हमारी स्मरण शक्ति इस बात पर भी निर्भर करती है कि आपने पहले किसी घटना को कितनी रुचि व महत्व दिया है। जब हम किसी व्यक्ति या घटना से आकर्षित होते हैं तो उस पर अधिक ध्यान देते हैं। तब ऐसे व्यक्ति या घटना को याद करना आसान हो जाता है। अच्छी स्मरण शक्ति स्कूल, कॉलेज व जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काम आती है। इसकी मदद से हम नई व उन्नत तकनीकों तथा परिवर्तनों को तेजी से आत्मसात कर पाते हैं। कंप्यूटर में कोई चिप या सॉफ्टवेयर लगा कर उसकी मैमरी सुधार सकते हैं। मस्तिष्क की संरचना कंप्यू…

समय क्या है ? समय का निर्माण कैसे होता है?

भौतिक वैज्ञानिक तथा लेखक पाल डेवीस के अनुसार “समय” आइंस्टाइन की अधूरी क्रांति है। समय की प्रकृति से जुड़े अनेक अनसुलझे प्रश्न है। समय क्या है ?समय का निर्माण कैसे होता है ?गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से समय धीमा कैसे हो जाता है ?गति मे समय धीमा क्यों हो जाता है ?क्या समय एक आयाम है ?अरस्तु ने अनुमान लगाया था कि समय गति का प्रभाव हो सकता है लेकिन उन्होने यह भी कहा था कि गति धीमी या तेज हो सकती है लेकिन समय नहीं! अरस्तु के पास आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत को जानने का कोई माध्यम नही था जिसके अनुसार समय की गति मे परिवर्तन संभव है। इसी तरह जब आइंस्टाइन साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के विकास पर कार्य कर रहे थे और उन्होने क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा था कि द्रव्यमान के प्रभाव से अंतराल मे वक्रता आती है। लेकिन उस समय आइंस्टाइन  नही जानते थे कि ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है। ब्रह्माण्ड के विस्तार करने की खोज एडवीन हब्बल ने आइंस्टाइन द्वारा “साधारण सापेक्षतावाद” के सिद्धांत के प्रकाशित करने के 13 वर्षो बाद की थी। यदि आइंस्टाइन को विस्तार करते ब्रह्माण्ड का ज्ञान होता तो वे इसे अपने साधारण …