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भविष्य की नयी तकनीक और विज्ञान

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विज्ञान का  सफर  आदि काल से  शुरू  हो गया था |  जब मनुष्य  कृषि और पत्थर के औंजारो का प्रयोग किया  विज्ञान ने जहा हमे तकनीको के द्वार खोल कर जीवन को सरल एवं  सुगम्य बनाया है परंतु अध्यात्म के विना जीवन मे शांती नहीं मिल सकती  कही ना कही विज्ञान और अध्यात्म  एक हो जाते है आगे देखे कैसे तकनीक ने हमारा जीवन आसान कर दिया है 

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जैविक कंप्यूटर

जैविक कंप्यूटर




सभी जैविक प्रणालियों, और यहां तक ​​कि पृथ्वी पर रहने वाले जीवों के प्राकृतिक आणविक कंप्यूटर रहे हैं. 

हम में से हर एक एक बायोमोलेकुलर कंप्यूटर, वह यह है कि सभी घटक अणु होते हैं जिसमें एक मशीन है" 


एक तार्किक ढंग से एक दूसरे को "बात कर. हार्डवेयर और एक और अच्छी तरह से परिभाषित किया गया है 


सॉफ्टवेयर. एक दूसरे के कुछ पूर्व निर्धारित रासायनिक कार्यों को पूरा करने के लिए सक्रिय है कि जटिल 


जैविक अणु होते हैं निवेश के नियमों का एक विशिष्ट सेट (सॉफ्टवेयर) और इस रसायन गणना प्रक्रिया के 


उत्पादन के बाद, विशिष्ट, क्रमादेशित परिवर्तन की प्रक्रिया है कि एक अणु है केवल बायोमोलेकुलर (जैसे 
डीएनए और एंजाइमों के रूप में) का उपयोग करना, प्रौद्योगिकी प्रणालियों इसराइल संस्थान में वैज्ञानिकों के 
एक उन्नत जैविक ट्रांसड्यूसर, आनुवंशिक कोड जोड़ तोड़, और नई इनपुट आउटपुट के रूप में उपयोग करने 
में सक्षम एक कंप्यूटिंग मशीन विकसित की है और निर्माण किया है बाद में संगणना के लिए. सफलता किसी 
दिन व्यक्ति के जीन थेरेपी और क्लोनिंग सहित जैव प्रौद्योगिकी में नई संभावनाएं पैदा हो सकती है.


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विज्ञान आत्‍मा शरीर

विज्ञान की नजर में आत्मा,


इस सिद्धांत के अनुसार हमारी आत्मा का मूल स्थान मस्तिष्क की कोशिकाओं के अंदर बने ढांचों में होता है जिसे माइक्रोटयूबुल्स कहते हैं। दोनों वैज्ञानिकों का तर्क है कि इन माइक्रोटयूबुल्स पर पड़ने वाले क्वांटम गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के परिणामस्वरूप हमें चेतनता का अनुभव होता है।

वैज्ञानिकों ने इस सिद्धांत को आर्वेक्स्ट्रेड ऑब्जेक्टिव रिडक्शन (आर्च-ओर) का नाम दिया है। इस सिद्धांत के अनुसार हमारी आत्मा मस्तिष्क में न्यूरॉन के बीच होने वाले संबंध से कहीं व्यापक है। दरअसल, इसका निर्माण उन्हीं तंतुओं से हुआ जिससे ब्रह्मांड बना था। यह आत्मा काल के जन्म से ही व्याप्त थी।

अखबार के अनुसार यह परिकल्पना बौद्ध एवं हिन्दुओं की इस मान्यता से काफी कुछ मिलती-जुलती है कि चेतनता ब्रह्मांड का अभिन्न अंग है। इन परिकल्पना के साथ हेमराफ कहते हैं कि मृत्यु जैसे अनुभव में माइक्रोटयूबुल्स अपनी क्वांटम अवस्था गंवा देते हैं, लेकिन इसके अंदर के अनुभव नष्ट नहीं होते। आत्मा केवल शरीर छोड़ती है और ब्रह्मांड में विलीन हो जाती है।

हेमराफ का कहना है कि हम कह सकते हैं कि दिल धड़कना बंद हो जाता है, रक्त का प…