सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

एंड्रॉयड की ऐसी रंगीन दुनिया, क्या आपने देखी है


Android
स्मार्ट डिजिटल कैमरा
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि एंड्रॉयड का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्मार्टफोन और टैबलेट से बाहर निकल कर एंड्रॉयड अब कैमरों में भी पहुंच चुका है। कुछ साल पहले तक डिजिटल कैमरे से फोटो खींचना बड़ी कामयाबी माना जाता था, लेकिन बदलते वक्त के साथ कैमरों की जगह स्मार्टकैमरों ने ले ली। सैमसंग और निकॉन ने स्मार्टकैमरे लॉन्च करके दुनियाभर में तहलका मचा दिया था।
निकॉन का कूलपिक्स एस800सी 16 मेगापिक्सल वाला कैमरा है, जिसमें 10 एक्स ऑप्टिकल जूम के अलावा वे सभी फीचर हैं, जो किसी स्मार्टकैमरा में होते हैं। यह कैमरा एंड्रॉयड 2.3 वर्जन को सपोर्ट करता है। इसके अलावा इसमें गूगल प्ले स्टोर से फोटो एडिटिंग एप्स भी डाउनलोड कर सकते हैं। वहीं, सैमसंग के गैलेक्सी कैमरा में 16 मेगापिक्सल का कैमरा है, जिसमें 1.4 गीगाह‌र्ट्ज क्वैडकोर प्रोसेसर है और एंड्रॉयड के 4.1 जैलीबीन ओएस को सपोर्ट करता है। इन कैमरों से यूजर फोटोग्राफ्स को सीधे सोशल नेटवर्किंग पर भी शेयर कर सकते हैं।
स्मार्ट माइक्रोवेव
कभी आपने सोचा है कि क्या एंड्रॉयड माइक्रोवेव ओवन में भी इंटीग्रेट हो सकेगा। जी हां, आपका फेवरेट ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड माइक्रोवेव भी चला सकता है। केरल की सेक्टरक्यूब टेक्नोलैब्स कंपनी ने एंड्रॉयड ओएस की मदद से मैड (माइक्रोवेव एंड्रॉयड इंटीग्रेटेड डिवाइस) नाम से ऐसा माइक्रोवेव डेवलप किया है, जो आपकी कुकिंग स्किल्स को इंप्रूव करने में काफी मदद कर सकता है। इस माइक्रोवेव की खासियत है कि इसे यूजर इंटरनेट से कनेक्ट कर सकता है, साथ ही रेसिपीज भी डाउनलोड कर सकता है। इसके अलावा यह स्मार्ट माइक्रोवेव डाउनलोड रेसिपीज के इनग्रेडिएंट्स को पढ़ कर वॉयस असिस्टेंट फीचर की मदद से आपको पढ़ कर सुना कर सकता है और खाना बन जाने पर यह इनफॉर्म भी कर सकता है। इस तरह यह कुकिंग प्रोसेस में हेल्प कर सकता है। इसके अलावा यूजर चाहें, तो अपने एग्जिस्टिंग माइक्रोवेव को मैड कंसोल लगा कर अपग्रेड भी कर सकते हैं। साथ ही, इस माइक्रोवेव में वीडियो रेसिपीज भी डाउनलोड कर सकते हैं।
स्मार्ट रेफ्रिजरेटर
बाजार में एंड्रॉयड से चलने वाला रेफ्रिजरेटर भी लॉन्च हो चुका है। अब किचन में खड़े-खड़े ही पूरी दुनिया से कनेक्ट हो सकते हैं। सैमसंग के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले चार डोर के रेफ्रिजरेटर में 8 इंच की एलसीडी स्क्रीन लगी है और यह वाई-फाई अनेबल्ड है। इसमें वेदर फोरकास्ट, न्यूज, कैलेंडर, नोट्स, ट्विटर, पैंडोरा, एपीक्यूरियस, पिकासा फोटो जैसी एप्स प्री-लोडेड हैं।
स्मार्टवॉच
कुछ साल पहले तक यह सोचना भी नामुमिकन था कि कलाई में पहनी घड़ी से भी कॉलिंग या मैसेजिंग कर सकेंगे, लेकिन बदलते वक्त के साथ यह भी पॉसिबल हो गया। सोनी ने सबसे पहले लाइवव्यू के नाम से एंड्रॉयड ओएस स्मार्टवॉच लॉन्च की थी। वहीं, हाल ही में सैमसंग ने भी गैलेक्सी गियर के नाम से स्मार्टवॉच लॉन्च की है, जिसे यूजर अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन से कनेक्ट कर सकते हैं। यह उन यूजर्स के लिए फायदेमंद है, जो फोन को बार-बार पॉकेट से बाहर नहीं निकालना चाहते। सैमसंग की इस स्मार्टवॉच में 1.63 इंच की सुपर अमोलेड डिस्प्ले, 800 मेगाह‌र्ट्ज का एग्जिनोस प्रोसेसर, 4 जीबी का स्टोरेज और 1.3 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है, जो फोटोग्राफी करने के अलावा 10 सेकेंड का वीडियो भी शूट कर सकता है। इसे एंड्रॉयड 4.3 पर चलने वाले सैमसंग स्मार्टफोन्स से ही कनेक्ट किया जा सकता है। इसमें बिल्ट-इन स्पीकर भी दिया गया है। इसकी बैट्री लाइफ 25 घंटे की है। उम्मीद है कि आने वाले सालों में आम घड़ियों की जगह स्मार्टवॉच ले लेंगी।
स्मार्टमीडिया प्लेयर
भले ही मीडिया प्लेयर्स की जगह स्मार्टफोंस ने ले ली है, लेकिन प्योर म्यूजिक के शौकीन अभी भी मीडिया प्लेयर पर ही अपनी फेवरेट ट्यूंस या क्लिप्स सुनना पसंद करते हैं। एंड्रॉयड का दमखम यहां भी दिखाई देता है। एपल के आईपॉड टच में भी आईओएस ओएस होता है, ठीक उसी की तर्ज पर कई कंपनीज एंड्रॉयड पोर्टेबल म्यूजिक प्लेयर डिवाइसेज डेवलप कर रही हैं, जिसमें हाई-एंड ऑडियो के साथ वीडियो कैपेबिलिटीज भी हों। फिलिप्स का गो-गियर कनेक्ट और सैमसंग गैलेक्सी प्लेयर 5.0 ऐसे ही हाई-एंड पोर्टेबल म्यूजिक प्लेयर हैं, जो एंड्रॉयड ओएस को सपोर्ट करते हैं। गो-गियर में एंड्रॉयड 2.3 जिंजरब्रेड ओएस और 3.2 इंच का डिस्प्ले, माइक्रोएसडी के साथ एक्सपेंडेबल स्टोरेज और वाई-फाई जैसे ऑप्शंस हैं, वहीं गैलेक्सी प्लेयर कैमरा, पॉवरफुल प्रोसेसर के साथ वाई-फाई जैसे फीचर हैं। इसके अलावा पीएमपी में गूगल प्ले स्टोर से म्यूजिक एप्स भी डाउनलोड की जा सकती हैं।
स्मार्ट रोबोट्स
जल्द ही ऐसे रोबोट्स भी आने वाले हैं, जो एंड्रॉयड ओएस पर चलेंगे। गूगल बग ड्रॉयड से इंस्पायर होकर डेवलपर्स ने बेरो नाम से एंड्रॉयड सिस्टम पर चलने वाला ऐसा रोबोट डेवलप किया है, जिसे एंड्रॉयड स्मार्टफोन या टैबलेट पर इंस्टॉल एप की मदद से कंट्रोल किया जा सकता है। यह ओपन सोर्स रोबोट है, जो 5 इंच दूर से ही रास्ते में आने वाली रुकावटों को पहचान लेता है। बेरो में नेविगेशन के लिए 2 इंफ्रारेड ट्रांसमीटर लगे हैं, साथ ही बेरो यूजर्स के साथ इंटरैक्ट भी कर सकता है।
फोनसैट
सुनकर आश्चर्य होगा कि एंड्रॉयड स्पेस में अपना मैजिक दिखा सकता है। हाल ही में नासा ने स्पेस में 3 स्मार्टफोन भेजे हैं, जिन्हें नासा ने फोनसैट प्रोजेक्ट नाम दिया है। ये नैनोसैटेलाइट कंज्यूमर ग्रेड के स्मार्टफोन्स हैं, जिनमें से एक एचटीसी का नेक्सस वन और दूसरा सैमसंग का नेक्सस एस है। ये दोनों ही गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं। हर स्मार्टफोन 4 वर्ग इंच साइज के बॉक्स में फिट किए गए, जो सैटेलाइट से जुड़े कंप्यूटर के तौर पर काम करते हैं। इसमें लगे सेंसर्स का यूज ऊंचाई मापने में और कैमरों का यूज पृथ्वी की तस्वीरें खींचने में किया गया। इन फोन्स को भेजने से पहले इनमें बड़े साइज की ढेर सारी लीथियम आयन बैटरीज और एक पावरफुल रेडियो लगाया गया और कॉलिंग या मेसेज सर्विस हटा दिया गया।
स्मार्ट सेट-टॉप बॉक्स
स्मार्ट टीवी के बाद एंटरटेनव‌र्ल्ड में अब स्मार्ट सेट-टॉप बॉक्सेज की एक नई ब्रीड आ रही है। सैमसंग जल्द ही ये डिवाइस लॉन्च करने वाला है, जिसे यूजर अपने टीवी सेट से कनेक्ट करके मोबाइल या टैबलेट में सेव मूवीज या फोटोग्राफ्स को प्ले कर सकेंगे। वहीं, पोर्टोनिक्स लाइमबॉक्स 1.2 गीगाह‌र्ट्ज का प्रोसेसर, 512 एमबी की रैम और 4जीबी की फ्लैश मेमोरी है। यह डिवाइस एंड्रॉयड 2.3 को सपोर्ट करती है। इसे टीवी मॉनिटर के साथ भी कनेक्ट किया जा सकता है। साथ ही, यूजर एंड्रॉयड प्ले स्टोर से भी एप्स डाउनलोड कर सकते हैं।
स्मार्टस्टिक
अगर आपके पास पुराना एलसीडी टीवी है, जिसमें यूएसबी का ऑप्शन नहीं हैं, तो आप उसे स्मार्ट टीवी में कनवर्ट कर सकते हैं। माइक्रोमैक्स ने आइसक्रीम सैंडविच पर चलने वाली ऐसी डिवाइस लॉन्च की है, जो आपके पुराने एलईडी सेट को एंड्रॉयड टीवी में कनवर्ट कर सकती है। इस डिवाइस में 1.2 गीगाह‌र्ट्ज का डुअल कोर प्रोसेसर, 1 जीबी डीडीआर3 रैम, एचडीएमआई आउटपुट और 4जीबी की इंटरनल मेमोरी के साथ वाई-फाई कनेक्ट का भी फीचर है।
- हरेंद्र चौधरी sabhar ; jagaran.com

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

vigyan ke naye samachar ke liye dekhe

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

समय क्या है ? समय का निर्माण कैसे होता है?

भौतिक वैज्ञानिक तथा लेखक पाल डेवीस के अनुसार “समय” आइंस्टाइन की अधूरी क्रांति है। समय की प्रकृति से जुड़े अनेक अनसुलझे प्रश्न है। समय क्या है ?समय का निर्माण कैसे होता है ?गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से समय धीमा कैसे हो जाता है ?गति मे समय धीमा क्यों हो जाता है ?क्या समय एक आयाम है ?अरस्तु ने अनुमान लगाया था कि समय गति का प्रभाव हो सकता है लेकिन उन्होने यह भी कहा था कि गति धीमी या तेज हो सकती है लेकिन समय नहीं! अरस्तु के पास आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत को जानने का कोई माध्यम नही था जिसके अनुसार समय की गति मे परिवर्तन संभव है। इसी तरह जब आइंस्टाइन साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के विकास पर कार्य कर रहे थे और उन्होने क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा था कि द्रव्यमान के प्रभाव से अंतराल मे वक्रता आती है। लेकिन उस समय आइंस्टाइन  नही जानते थे कि ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है। ब्रह्माण्ड के विस्तार करने की खोज एडवीन हब्बल ने आइंस्टाइन द्वारा “साधारण सापेक्षतावाद” के सिद्धांत के प्रकाशित करने के 13 वर्षो बाद की थी। यदि आइंस्टाइन को विस्तार करते ब्रह्माण्ड का ज्ञान होता तो वे इसे अपने साधारण …

पहला मेंढक जो अंडे नहीं बच्चे देता है

वैज्ञानिकों को इंडोनेशियाई वर्षावन के अंदरूनी हिस्सों में एक ऐसा मेंढक मिला है जो अंडे देने के बजाय सीधे बच्चे को जन्म देता है.



एशिया में मेंढकों की एक खास प्रजाति 'लिम्नोनेक्टेस लार्वीपार्टस' की खोज कुछ दशक पहले इंडोनेशियाई रिसर्चर जोको इस्कांदर ने की थी. वैज्ञानिकों को लगता था कि यह मेंढक अंडों की जगह सीधे टैडपोल पैदा कर सकता है, लेकिन किसी ने भी इनमें प्रजनन की प्रक्रिया को देखा नहीं था. पहली बार रिसर्चरों को एक ऐसा मेंढक मिला है जिसमें मादा ने अंडे नहीं बल्कि सीधे टैडपोल को जन्म दिया. मेंढक के जीवन चक्र में सबसे पहले अंडों के निषेचित होने के बाद उससे टैडपोल निकलते हैं जो कि एक पूर्ण विकसित मेंढक बनने तक की प्रक्रिया में पहली अवस्था है. टैडपोल का शरीर अर्धविकसित दिखाई देता है. इसके सबूत तब मिले जब बर्कले की कैलिफोर्निया यूनीवर्सिटी के रिसर्चर जिम मैकग्वायर इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप के वर्षावन में मेंढकों के प्रजनन संबंधी व्यवहार पर रिसर्च कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें यह खास मेंढक मिला जिसे पहले वह नर समझ रहे थे. गौर से देखने पर पता चला कि वह एक मादा मेंढक है, जिसके साथ कर…

मिला हमेशा जवान रहने का नुस्खा

एक प्रोफेसर का दावा है कि उसने दक्षिण जापान के लोगों की लंबी उम्र का राज ढूंढ निकाला है. यह राज एक खास पौधे के अर्क में छुपा है, जिसे स्थानीय लोग "गेटो" के नाम से जानते हैं. ओकिनावा की रियूक्यूस यूनिवर्सिटी में कृषि विज्ञान के प्रोफेसर शिंकिचि तवाडा ने दक्षिण जापान के लोगों की लंबी उम्र का राज ढूंढ निकाला है. तवाडा को विश्वास है कि गहरे पीले-भूरे से रंग का दिखने वाला एक खास पौधे "गेटो" का अर्क इंसान की उम्र 20 फीसदी तक बढ़ा सकता है. तवाडा कहते हैं, "ओकिनावा में कई दशक से लंबी उम्र तक जीने का दर दुनिया में सबसे ज्यादा रहा है और मुझे लगता है कि इसका कारण जरूर यहां के परंपरागत खान पान में ही छुपा है." काइको उहारा 64 साल की हैं लेकिन अपनी उम्र से कहीं कम की दिखती हैं. इसका राज वह गेटो को बताती हैं. काइको अपनी दुकान में ऐसे सौंदर्य उत्पाद भी बेचती हैं जिनमें गेटो ही मुख्य घटक होता है, "मैं गेटो का काढ़ा पीती हूं, जो मुझे तरो ताजा कर देता है, और मैं इस पौधे के अर्क को पानी में घोल कर लगाती हूं जिससे झुर्रियां भी कम होती हैं." दक्षिण जापान में जीते है…