सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

AIDS का नया टीका, शरीर से HIV का नामोनिशान मिटा देगा!




वाशिंगटन : एड्स का एक नया टीका शरीर से घातक एचआईवी को पूरी तरह से खत्म करने में सक्षम हो सकता है। एक नए अध्ययन में इस टीके के बारे में यह दावा किया गया है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि ओरेजोन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में विकसित किए गए एचआईवी एड्स के इस टीके ने वनमानुषों में एड्स फैलाने वाले वायरसों के सभी निशान प्रभावी तरीके से मिटा देने की क्षमता का प्रदर्शन किया।

इस टीके का परीक्षण वनमानुषों में पाए जाने वाले एचआईवी की तरह के एक अन्य वायरस एसआईवी पर किया जा रहा है। एसआईवी बंदरों में एड्स फैलाता है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि एचआईवी के लिए ऐसे टीके की जांच जल्दी ही इंसानों पर की जा सकेगी।

ओएचएसयू वैक्सीन एंड जीन थरेपी इंस्टीट्यूट के सहायक निदेशक लुईस पिकर ने कहा कि अभी तक एचआईवी संक्रमण का इलाज बहुत कम मामलों में ही किया जा सका है, जिनमें एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को एंटी-वायरल दवाइयां संक्रमण के तुरंत बाद दी गईं या जिन्होंने कैंसर पर काबू पाने के लिए सेल ट्रांसप्लांट करवाया। पिकर ने कहा कि हालिया शोध से प्रतीत होता है कि नए टीके से प्राप्त प्रतिरोधन क्षमता की प्रतिक्रियाओं में शरीर से एचआईवी पूरी तरह मिटाने की भी क्षमता हो सकती है।’

अपने परीक्षण में पिकर ने साइटोगेलोवायरस या सीएमवी का इस्तेमाल किया। यह साधारण वायरस बहुत बड़ी जनसंख्या में पाया जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि सीएमवी और एसआईवी का आपस में मिलना एक अलग तरह का प्रभाव रखता है। ‘इफैक्टर मेमोरी’ के ये टी सेल एसआईवी संक्रमित कोशिकाओं को ढूंढने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं। यह अध्ययन नेचर नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

vigyan ke naye samachar ke liye dekhe

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

30 सेकंड के फर्क ने मिटा दिया था डायनसोर युग का वजूद

डायनासोर युग के अंत के लिए कहा जाता है कि एक बहुत बड़ा ऐस्टरॉइड धरती से टकराया था जिससे पैदा हुए विस्फोट ने इन विशालकाय जानवरों का वजूद खत्म कर दिया। लेकिन इस विस्फोट की टाइमिंग को लेकर बीबीसी की एक डॉक्युमेंट्री में बहुत दिलचस्प तथ्य सामने आया है। द डे डायनासोर डाइड नाम की इस डॉक्युमेंट्री में बताया गया है कि जिस ऐस्टरॉइड ने डायनासोरों का अंत किया, अगर वह धरती से 30 सेकंड जल्दी (पहले) या 30 सेकंड देर (बाद) से टकराता तो उसका असर जमीनी भूभाग पर इतना कम होता कि डायनासोर खत्म नहीं होते। ऐसा इसलिए क्योंकि 30 सेकंड की देरी या जल्दी गिरने की स्थिति में वह जमीन की बजाय समुद्र में गिरता।

यह ऐस्टरॉइड 6.6 करोड़ साल पहले मेक्सिको के युकटॉन प्रायद्वीप से टकराया था जिससे वहां 111 मील चौड़ा और 20 मील गहरा गड्ढा बन गया था। वैज्ञानिकों ने इस गड्ढे की जांच की तो वहां की चट्टान में सल्फर कम्पाउन्ड पाया गया। ऐस्टरॉइट की टक्कर से यह चट्टान वाष्प में बदल गई थी जिसने हवा में धूल का बादल बना दिया था। इसके परिणामस्वरूप पूरी धरती नाटकीय रूप से ठंडी हो गई और पूरे एक दशक तक इसी स्थिति में रही। उन हालात में अधिकत…

स्मरण शक्ति में सुधार

बहुत अधिक संख्या में ऐसे लोग हैं जो प्राय: अपनी कमजोर स्मरण क्षमता को लेकर चिंतित रहते हैं। जब वे किसी का पक्ष या सामने वाले व्यक्ति का नाम तक भूल जाते हैं तो उन्हें और भी बुरा लगता है। ऐसा उनके साथ भी होता है, जिनके पास पहले अच्छी स्मरण शक्ति थी। हमें याद रखना चाहिए कि स्मरण शक्ति एक बैंक की तरह है। यदि इसमें कुछ डालेंगे, तभी तो निकाल सकेंगे। यह मान कर चलें कि आपकी स्मरण शक्ति तीव्र है, स्वयं से सकारात्मक अपेक्षा रखें। यदि मानेंगे कि आपका दिमाग काम नहीं करता, याददाश्त हाथ से निकल गई है तो दिमाग भी यही मानने लगेगा। हमारी स्मरण शक्ति इस बात पर भी निर्भर करती है कि आपने पहले किसी घटना को कितनी रुचि व महत्व दिया है। जब हम किसी व्यक्ति या घटना से आकर्षित होते हैं तो उस पर अधिक ध्यान देते हैं। तब ऐसे व्यक्ति या घटना को याद करना आसान हो जाता है। अच्छी स्मरण शक्ति स्कूल, कॉलेज व जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काम आती है। इसकी मदद से हम नई व उन्नत तकनीकों तथा परिवर्तनों को तेजी से आत्मसात कर पाते हैं। कंप्यूटर में कोई चिप या सॉफ्टवेयर लगा कर उसकी मैमरी सुधार सकते हैं। मस्तिष्क की संरचना कंप्यू…

समय क्या है ? समय का निर्माण कैसे होता है?

भौतिक वैज्ञानिक तथा लेखक पाल डेवीस के अनुसार “समय” आइंस्टाइन की अधूरी क्रांति है। समय की प्रकृति से जुड़े अनेक अनसुलझे प्रश्न है। समय क्या है ?समय का निर्माण कैसे होता है ?गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से समय धीमा कैसे हो जाता है ?गति मे समय धीमा क्यों हो जाता है ?क्या समय एक आयाम है ?अरस्तु ने अनुमान लगाया था कि समय गति का प्रभाव हो सकता है लेकिन उन्होने यह भी कहा था कि गति धीमी या तेज हो सकती है लेकिन समय नहीं! अरस्तु के पास आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत को जानने का कोई माध्यम नही था जिसके अनुसार समय की गति मे परिवर्तन संभव है। इसी तरह जब आइंस्टाइन साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के विकास पर कार्य कर रहे थे और उन्होने क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा था कि द्रव्यमान के प्रभाव से अंतराल मे वक्रता आती है। लेकिन उस समय आइंस्टाइन  नही जानते थे कि ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है। ब्रह्माण्ड के विस्तार करने की खोज एडवीन हब्बल ने आइंस्टाइन द्वारा “साधारण सापेक्षतावाद” के सिद्धांत के प्रकाशित करने के 13 वर्षो बाद की थी। यदि आइंस्टाइन को विस्तार करते ब्रह्माण्ड का ज्ञान होता तो वे इसे अपने साधारण …